सोशल मीडिया मार्केटिंग का महत्व 2018 (Social media marketing value)

Social media marketing value

वर्तमान सामाजिक परिवेश में सोशल मीडिया वो चौपाल है जहां विचारों का आदान-प्रदान 24 घंटे संभव है, ऐसे में मार्केटिंग के तौर पर यह सबसे खास विकल्प भी बनकर उभरा है. ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, यू-ट्यूब आदि की कीर्ति किसी से नहीं छिपी और इनमें से प्रत्येक पोर्टल की अपनी बड़ी फेन फालोइंग रजिस्टर्ड है. ऐसे में इन माध्यमों द्वारा प्रदान की जा रही मार्केटिंग की सुविधा में तय पैकेज के आधार पर मार्केटिंग की जा सकती है. मजाक के तौर परअब तो कहा भी जाने लगा है कि, यदि सोशल मीडिया पर आपने अपना खाता नहीं खोला है तो आप असामाजिक प्राणी हैं. भले ही ये मजाक हो लेकिन जहां इन माध्यमों के जरिए कई बिजनेस-मैन न केवल ऑन लाईन ट्रेडिंग की सुविधा कस्टमर्स को दे रहे हैं बल्कि सोशल मीडिया मार्केटिंग के जरिए देश के साथ विदेशों के यूजर्स को भी अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब हो रहे हैं. ये सोशल मीडिया मार्केटिंग का ही असर है कि पुरानी चीजों को सोशल मीडिया की मदद से बेचने का आईडिया पब्लिक को पसंद आया और सर्विस प्रोवाईडर द्वारा तैयार जुमला OLX पर बेच दे यार यूजर्स की जुबान पर बहुत कम समय में चढ़ने में कामयाब रहा.

इसलिए भी कारगर है सोशल मीडिया मार्केटिंग –

  1. ब्रांड की मान्यता बढ़ाने में कारगर- सोशल मीडिया मार्केटिंग में वस्तु या व्यक्ति को ज्यादा लोगों के सामने लाईवली रखा जा सकता है. जबकि प्रचार के अन्य माध्यम वन-वे होते हैं जिनमें यूजर्स की राय नहीं मिल पाती जबकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में यूजर्स की आवक-जावक के साथ ही प्रतिक्रिया भी आसानी से मिल जाती है. सोशल मीडिया मार्केटिंग में कई प्लेटफॉर्म पर मौजूदगी दर्ज होने से यूजर्स में वस्तु या व्यक्ति के प्रति भरोसा पैदा होता है.
  2. टेक्सास यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन से पता चला है कि, सोशल मीडिया पर इंगेज रहने वाले प्रोडक्ट या इंडिविजुअल के प्रति यूजर्स ज्यादा लॉयल्टी रखते हैं. अध्ययन के मुताबिक प्लानिंग के साथ की गई सोशल मीडिया मार्केटिंग प्रोवाइडर के लिए सोने में सुहागे के समान है.
  3. सोशल मीडिया मार्केटिंग के तहत सोशल मीडिया पर की गई प्रत्येक पोस्ट के जरिए हर बार यूजर्स से नए तरीके से जुड़ने का मौका मिलता है. इसके जरिये पुराने यूजर्स को जहां ताजा अपडेट दिया जा सकता है वहीं नए यूजर्स को सदस्य बतौर जोड़ा जा सकता है.
  4. बिन साख सब राख- सोशल मीडिया मार्केटिंग के तहत किये गए प्रत्येक ब्लॉग पोस्ट, इमेज, वीडियो या कमेंट से यूजर्स से प्रतिक्रिया हासिल करने का मौका भी मिलता है. डिफरेंट प्लेटफॉर्म पर सोशल मीडिया मार्केटिंग के तहत रखी गई जानकारी से प्रोडक्ट या इंडिविजुअल की खास पहचान बनती है जो बाद में साख में भी वृद्धि करती है. साख के बारे में कहा भी गया है बिन साख सब राख.
  5. सोशल मीडिया मार्केटिंग में यूजर्स के बीच कंपनी की बजाए व्यक्तिगत तौर पर जुड़ने से सर्विस प्रोवाइडर और यूजर्स के बीच अपनेपन का भाव डेवलप होता है. यह तरीका साख में वृद्धि करने का सबसे बेहतर आइडिया है.
  6. बेहतर रणनीति के साथ की गई डिजिटल मार्केटिंग से सौ फीसदी रिटर्न हासिल किया जा सकता है. कुछ सर्विस प्रोवाइडर तो ऐसे भी हैं जो बजाए खुद की बेवसाईट डेवलप किए सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के जरिए व्यापक तौर पर बिजनेस कर रहै हैं और मुनाफा कमा रहे हैं. कई नेताओं और अभिनेताओं के उनकी वेबपोर्टल पर उतने फालोअर्स नहीं होंगे जितने ट्विटर पर. इसका कारण साफ है ट्विटर ने अपनी मीडिया मार्केटिंग को इतनी कुशलता से अमलीजामा पहनाया है कि उसमें होने वाला प्रत्येक अपडेट जानने के लिए यूजर्स लालयित रहते हैं.
  7. सोशल मीडिया मार्केटिंग के तहत यूजर्स से रोजाना संपर्क साधने का मौका मिलता है. ऐसे में पुराने यूजर्स का विश्वास जीतने में मदद मिलती है वहीं नए सर्फर्स का भरोसा हासिल करने में भी आसानी होती है.
  8. सोशल मीडिया मार्केटिंग के तहत की गई इंटर-लिंकिंग और बनाए गए कीवर्ड्स से यूजर्स का ध्यान बांधकर रखा जा सकता है. प्रत्येक सोशल मीडिया अकाउंट्स प्रोफाइल को एक-दूसरे से लिंक करने से यूजर्स का बड़ा वर्ग अपने पक्ष में जुटाने में भी भरसक मदद मिलती है.
  9. सोशल मीडिया मार्केटिंग अन्य विकल्पों के मुकाबले न केवल काफी सस्ती है, बल्कि इसमें पड़ने वाले असर को भी परखा जा सकता है. फेसबुक और ट्विटर मौजूदा दौर में सस्ती दर पर पेड एडवरटीज़मेंट का विकल्प मुहैया करा रहे हैं जो तेजी से परिणाम आपके पक्ष में करने में सक्षम हैं.
  10. SEO सर्च एंजिन में वरीयता हासिल करने का सबसे कारगर उपाय है. सिर्फ रोजाना पोस्ट अपडेट करने से ही बात नहीं बनती बल्कि व्यवस्थित टाइटल टैग्स और मेटा डिस्क्रिप्शन का होना भी प्रोडक्ट और इंडिविजुअल की साख बनाने के लिए जरूरी है. गूगल और अन्य सर्च एंजिन अपनी सर्च के दौरान खोजे जाने वाले कंटेंट्स की सोशल मीडिया पर मौजूदगी के आधार पर रैंकिंग करता है.
  11. सोशल मीडिया मार्केटिंग के जरिए अपनी बात को विस्तार से रखा जा सकता है. इसमें जगह (प्रिंट मीडियम), समय (टेलिविजन) का बंधन नहीं होता. इसमें ज्यादा से ज्यादा ग्राफिक्स और वीडियो के संयोजन से प्रोडक्ट अथवा इंडिविजुअल के बारे में ज्यादा से ज्यादा लिखा, बोला, दिखाया जा सकता है. साथ ही टारगेट ऑडिएंस की रुचि और व्यवहार का अध्ययन करने में भी मदद मिलती है.
  12. आजकल प्रोफाइल में प्रतिक्रिया वाला कॉलम आम हो गया है, जिससे यूजर्स का मन टटोलने में आसानी होती है. कंपनी हो या फिर उत्पाद या फिर नेता-अभिनेता सभी में आज एक बात कॉमन है वो है डिजिटल मीडिया पर उनकी मौजूदगी. ऐसे में यदि प्रतिस्पर्धी सोशल मीडिया में नहीं है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक कारगर उपाय है.

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SEO vs SMO 10 Points

SEO vs SMO 10 Points

सर्च एंजिन ऑप्टिमाईजेशन बनाम सोशल मीडिया ऑप्टिमाईजेशन

  1. SEO एक टूल है जिसके जरिए चाहे गए एड्रेस पर यूजर्स का ट्रेफिक बढ़ाया जाता है. SMO यानी सोशल मीडिया ऑप्टिमाईजेशन और SEO एक दूसरे के मददगार हैं.
  2. SEO में जहां ऑन-पेज और ऑफ-पेज के जरिए व्यूअर्स को आकृष्ट किया जाता है, वहीं SMO में कंटेंट को फोटो और वीडियो के जरिए आकर्षक अंदाज में पेश कर यूजर्स को आकृष्ट किया जाता है.
  3. SEO में जहां कंटेंट में शब्दों से लेकर उसकी कसावट अहम होती है वहीं SMO में सोशल मीडिया पर बनाए गए एड्रेस पर कंटेंट की धाराप्रवाहिता, आकर्षक साज-सज्जा, विषय की गहराई से जानकारी के साथ तात्कालिकता और लगातार प्रस्तुति जरूरी होती है. क्योंकि पुरानी सामग्री होने और नया अपडेट न होने से यूजर्स सोशल एड्रेस से कन्नी भी काट लेते हैं.
  4. SEO में गलत कीवर्ड, चोरी की सामग्री जहां सर्च एंजिन पर सर्विस प्रोवाइडर को बैन करा सकती है वहीं SMO में सोशल एड्रेस पर दी गई ऐसी जानकारियां आपका बंटाधार करने के लिए काफी है, क्योंकि सोशल मीडिया पर काफी अलर्ट व्यूअर्स होते हैं जो आपस में जानकारी शेयर करते रहते हैं और ऐसे में चोरी की गई सामग्री तुरंत पकड़ में आ जाती है.
  5. SEO और SMO के लिए कंटेंट की पेशकश ऐसी होनी चाहिए जिससे पेज या एड्रेस बार जल्द खुल सके. क्योंकि आकर्षक बनाने के चक्कर में कई बार सोशल एड्रेस की डिजाइनिंग में भारी फाइल्स या टेंपलीट का उपयोग करने से एड्रेस को लोड होने में काफी समय लगता है जिससे यूजर्स वहां से रवानगी भर लेता है.
  6. सोशल मीडिया में RSS फीड, सोशल न्यूज़ और बुकमार्किंग साइट्स के साथ सोशल नेटवर्किंग साइट्स (social networking sites) ट्विटर, फेसबुक, ब्लॉगिंग साइट्स और वीडियो आदि शामिल हैं. टारगेट एक ही होने के कारण SMO औरSEO एक-दूसरे के पर्याय हैं. कहना गलत नहीं होगा SMO, SEO के लिए एक जरूरी एलिमेंट है.
  7. SEO और SMO दोनों ही सोशल नेटवर्किंग का हिस्सा हैं इसलिए इसमें जनभागीदारी बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है. ऐसे में सामाजिक, राष्ट्रीय गौरव के अवसर पर जन संदेशों के जरिए भी सोशल एड्रेस पर ट्रेफिक बढ़ाने में मदद मिलती है.
  8. प्रचलित प्रतियोगिता, साइट्स पर अपने विचार रखकर भी अपने सोशल एड्रेस और विचारों को यूजर्स के सामने पेश करने से न केवल रिलेशनशिप डेवलप होती है, बल्कि आपके विचार लोगों को पसंद आने पर यूजर्स आपके एड्रेस की ओर रुख करने लगते हैं.
  9. SEO और SMO के लिए फ्रेश कंटेंट होना बहुत जरूरी है. पुराना और बोझिल कंटेंट यूजर्स को बोर करने लगता है साथ ही यदि कंटेंट रोजाना बदल नहीं रहा हो तो भी रोज आने वाले यूजर्स आना बंद कर देते हैं.
  10. SEO और SMO के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है रेपुटेशन क्योंकि सारा काम साख के लिए किया जा रहा है, इसलिए इसमें मौलिकता के साथ ही मनोभावनाओं का भी ख्याल रखना जरूरी है. साख बनने पर आपका भी काम बनेगा, वरना साख पर बट्टा लगते ही काम तमाम भी तय है.

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